
जमशेदपुर : देश के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी घरानों में शामिल टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों टाटा स्टील और टाटा मोटर्स को टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग से बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों कंपनियों के पास टाटा संस में मौजूद हिस्सेदारी की कीमत करीब 61,200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
आरबीआई के निर्देश पर हो रही लिस्टिंग
टाटा संस की लिस्टिंग की तैयारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश के तहत हो रही है। टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की श्रेणी में रखा गया है। नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है।
टाटा स्टील की हिस्सेदारी कितनी?
टाटा संस में टाटा स्टील की करीब 3.06 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं टाटा मोटर्स की भी टाटा संस में करीब 3.06 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के शेयर का बाजार मूल्य तय होने से इन हिस्सेदारियों की वास्तविक कीमत सामने आएगी।
61,200 करोड़ की हिस्सेदारी का अनुमान
बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार टाटा संस का कुल बाजार मूल्य करीब 10 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। इस आधार पर टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी का मूल्य करीब 30,600-30,600 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। दोनों को मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 61,200 करोड़ रुपये बैठता है।
जमशेदपुर को क्या होगा फायदा?
टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के मजबूत होने का असर जमशेदपुर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से भविष्य में नई परियोजनाओं, तकनीक में निवेश और कर्ज लेने की क्षमता बढ़ सकती है। इसका सीधा या अप्रत्यक्ष लाभ औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार पर पड़ने की संभावना है।
टाटा संस का आईपीओ आखिर क्यों आ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार टाटा संस की लिस्टिंग का बड़ा कारण आरबीआई के नियम हैं। इसके तहत निर्धारित श्रेणी की कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ता है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के शेयरों का बाजार मूल्य तय होगा और उसकी हिस्सेदार कंपनियों के निवेश का मूल्य भी अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
नोट: 61,200 करोड़ रुपये का आंकड़ा अनुमानित मूल्यांकन के आधार पर है। वास्तविक मूल्य टाटा संस की लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत पर निर्भर करेगा।











