
नई दिल्ली : करीब छह दशक से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए छह राज्यों के बीच समझौते की तैयारी है। लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से पानी की उपलब्धता और बिजली उत्पादन, दोनों को बढ़ाने की उम्मीद है। हालांकि समझौते के बाद भी निर्माण शुरू होने की समयसीमा और परियोजना के सभी लाभ सामने आने में कितना समय लगेगा, यह स्पष्ट होना बाकी है।
पानी और खर्च का हिसाब क्यों अहम है?
किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी से जुड़ी है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना को लंबे समय तक आगे बढ़ाना कठिन रहा, क्योंकि संबंधित राज्यों के बीच पानी के हिस्से, बिजली के लाभ और निर्माण खर्च को लेकर सहमति जरूरी थी। प्रस्तावित समझौते में इन्हीं मुद्दों की जिम्मेदारी तय करने की बात है। केंद्र सरकार जल संबंधी हिस्से के खर्च में बड़ी सहायता देगी, जबकि राज्यों की भागीदारी भी समझौते के अनुसार निर्धारित होगी।
किन राज्यों को मिलेगा पानी?
हरियाणा को 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने की बात है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की भूमिका परियोजना के जल और बिजली संबंधी प्रावधानों से भी जुड़ी है। ये आंकड़े प्रस्ताव का हिस्सा हैं; वास्तविक आपूर्ति परियोजना पूरी होने और उसके संचालन पर निर्भर करेगी।
बांध से क्या लाभ मिलने की उम्मीद है?
परियोजना में पानी जमा करके पेयजल और सिंचाई के लिए उसका उपयोग करने की योजना है। इससे गर्मियों में जल उपलब्धता बढ़ सकती है। मानसून के दौरान नियंत्रित जल प्रवाह यमुना में बाढ़ प्रबंधन में भी मदद कर सकता है। परियोजना से बिजली उत्पादन की भी उम्मीद है, लेकिन उसके लाभ तभी मिलेंगे जब निर्माण, वितरण व्यवस्था और संबंधित बुनियादी काम पूरे होंगे।
समझौते के बाद भी कई कदम बाकी
किशाऊ को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा पहले ही मिल चुका है। अब छह राज्यों की सहमति पुराने अंतरराज्यीय विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। फिर भी समझौते पर हस्ताक्षर निर्माण पूरा होने के बराबर नहीं हैं। वित्तीय व्यवस्था, आवश्यक प्रक्रियाएँ और निर्माण कार्य आगे की गति तय करेंगे। इसलिए दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक लोगों के लिए सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि तय पानी और बिजली वास्तव में कब मिलने लगेंगे।











