
रांची : वियतनाम में सड़क दुर्घटना के बाद जान गंवाने वाले योग प्रशिक्षक राजा कुमार वर्मा के आश्रितों को झारखंड सरकार ने पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। रांची के कैलास नगर निवासी राजा कुमार वर्मा के परिवार को यह राशि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर दी गई। इससे पहले राज्य सरकार के प्रयासों से उनका पार्थिव शरीर विदेश से वापस लाकर पांच अक्टूबर को परिजनों को सौंपा गया था।
प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना से मिला सहयोग
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय की ओर से सात अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, सहायता राशि ‘मुख्यमंत्री झारखण्ड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना’ के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है। श्रम मंत्री और राज्यसभा सांसद ने दिवंगत के परिजनों को यह राशि सौंपी।विदेश में काम करने के दौरान हुई इस दुखद घटना के बाद परिवार ने राज्य सरकार से मदद मांगी थी। मामले में पहले पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की व्यवस्था की गई और इसके बाद आश्रितों को योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया गया।
योग प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत थे राजा
राजा कुमार वर्मा वियतनाम में योग प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे। वहां एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद परिजनों के सामने उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने की चुनौती खड़ी हुई। परिवार ने राज्य सरकार से गुहार लगाई कि आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर पार्थिव शरीर उनके घर तक पहुंचाया जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने कार्रवाई शुरू की।
दूतावास और विदेश मंत्रालय से किया समन्वय
पार्थिव शरीर की वापसी के लिए राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और वियतनाम की राजधानी हनोई स्थित भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क बनाए रखा। संबंधित संस्थाओं के समन्वय से आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं। औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद पार्थिव शरीर हनोई से कोलकाता हवाई अड्डे लाया गया। विदेश से वापसी की इस प्रक्रिया में राज्य सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की भूमिका रही। इसके बाद कोलकाता से रांची तक पहुंचाने की जिम्मेदारी के लिए जिला प्रशासन ने व्यवस्था की।
निःशुल्क एम्बुलेंस से पैतृक आवास तक पहुंचाया
रांची जिला प्रशासन ने कोलकाता हवाई अड्डे से पार्थिव शरीर को कैलास नगर स्थित पैतृक आवास तक लाने के लिए निःशुल्क एम्बुलेंस उपलब्ध कराई। इस व्यवस्था के माध्यम से पांच अक्टूबर को पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक रांची पहुंचाकर परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में सरकारी सहयोग के दो प्रमुख चरण रहे—पहले विदेश से पार्थिव शरीर की वापसी और फिर आश्रितों को आर्थिक सहायता। परिवार की गुहार पर शुरू हुई कार्रवाई के बाद अब पांच लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान कर दिया गया है। सहायता अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित राज्य योजना के अंतर्गत दी गई है।












