मां दुर्गा के स्वागत में करोड़ों के कारोबार की संभावनाएं, मूर्तिकारों से लेकर पंडाल निर्माता, लाइटिंग कारोबारी, फूल विक्रेता और छोटे दुकानदारों तक को मिलता है काम
जमशेदपुर : दुर्गा पूजा का नाम आते ही मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं, आकर्षक पंडाल, रंग-बिरंगी रोशनी और श्रद्धालुओं की भीड़ आंखों के सामने उभरने लगती है। लेकिन इस धार्मिक उत्सव का एक दूसरा चेहरा भी है। यह चेहरा है रोजगार, कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का। जमशेदपुर में दुर्गा पूजा केवल आस्था और परंपरा का महापर्व नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा एक बड़ा आयोजन भी है। पूजा की तैयारियां शुरू होते ही मूर्तिकारों, पंडाल निर्माण में लगे कारीगरों, बिजली मिस्त्रियों, लाइटिंग कारोबारियों, फूल विक्रेताओं, सजावट करने वालों, छोटे दुकानदारों और अस्थायी कामगारों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं।
शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थापित होने वाले दुर्गा पूजा पंडालों की तैयारियों में कई तरह के कारोबार शामिल होते हैं। कहीं भव्य मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जाती है, तो कहीं किसी ऐतिहासिक इमारत, धार्मिक स्थल या अनोखी अवधारणा को पंडाल का रूप दिया जाता है। इन निर्माण कार्यों में बांस, कपड़ा, लकड़ी, प्लाईवुड, रंग, सजावटी सामग्री और बिजली के उपकरणों की मांग बढ़ जाती है। इसका लाभ केवल पूजा समितियों से सीधे जुड़े लोगों को ही नहीं, बल्कि इन सामग्रियों की आपूर्ति करने वाले कारोबारियों को भी मिलता है।
मूर्तिकारों की मेहनत से शुरू होती है तैयारी
दुर्गा पूजा की आर्थिक गतिविधियों में मूर्तिकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए कारीगरों को कई चरणों में काम करना पड़ता है। मिट्टी और अन्य सामग्री जुटाने से लेकर प्रतिमा का आकार तैयार करने, रंग-रोगन करने और अंतिम सजावट तक में काफी मेहनत लगती है। प्रतिमा की बनावट, आकार और सजावट के अनुसार इसकी लागत भी अलग-अलग होती है।
पूजा के दौरान प्रतिमाओं की मांग बढ़ने से मूर्तिकारों और उनके सहयोगियों को काम मिलता है। उनके साथ मिट्टी तैयार करने वाले, रंग करने वाले, सजावट करने वाले और प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने में लगे लोगों की आजीविका भी इससे जुड़ी रहती है।
पंडाल निर्माण से मिलता है कई लोगों को रोजगार
जमशेदपुर में दुर्गा पूजा पंडालों की सजावट और निर्माण अपने आप में एक बड़ा काम है। पंडाल की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उसे जमीन पर उतारने तक कई तरह के विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। बांस बांधने वाले कारीगर, बढ़ई, वेल्डर, पेंटर, कपड़ा लगाने वाले मजदूर और सजावट करने वाले कलाकार मिलकर इसे भव्य स्वरूप देते हैं।
पंडाल की थीम जितनी जटिल होती है, उसके निर्माण में उतने ही अधिक कौशल और समय की जरूरत पड़ सकती है। कई जगहों पर काम पूरा करने के लिए निर्धारित समय में अतिरिक्त मजदूर भी लगाए जाते हैं। इससे स्थानीय और बाहर से आने वाले कारीगरों को रोजगार मिलने की संभावना बढ़ती है।
रोशनी और साज-सज्जा का भी बड़ा कारोबार
दुर्गा पूजा में पंडालों की खूबसूरती बढ़ाने में लाइटिंग की अहम भूमिका होती है। रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक विद्युत सज्जा और विशेष प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इसके लिए बिजली मिस्त्रियों, लाइटिंग तकनीशियनों और सजावट से जुड़े कारोबारियों की जरूरत होती है।
पंडालों के अलावा आसपास की सड़कों और बाजारों में भी सजावट की जाती है। बिजली के तार, एलईडी लाइट, सजावटी झालर और अन्य उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। इसके साथ ही जनरेटर, बिजली आपूर्ति और तकनीकी रखरखाव से जुड़े लोगों को भी काम मिलता है।
फूल, प्रसाद और पूजा सामग्री की बढ़ती मांग
दुर्गा पूजा के दौरान फूलों, माला, नारियल, अगरबत्ती, चुनरी और अन्य पूजा सामग्रियों की मांग बढ़ जाती है। मंदिरों, पूजा पंडालों और घरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु इन वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। इससे फूल विक्रेताओं, पूजा सामग्री की दुकानों और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त बिक्री का अवसर मिलता है।
पंडालों के आसपास अस्थायी दुकानें भी लगाई जाती हैं। इन दुकानों पर खिलौने, सजावटी सामान, खानपान की वस्तुएं और अन्य उत्पाद बेचे जाते हैं। हालांकि, कारोबार की वास्तविक मात्रा हर इलाके में अलग हो सकती है और इसका आकलन करने के लिए दुकानदारों तथा बाजार संगठनों से आंकड़े जुटाना जरूरी है।
खानपान और छोटे कारोबारियों के लिए भी खास समय
दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ने से खानपान के कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। चाट, गोलगप्पे, मिठाई, नाश्ता और अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानें श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा खिलौने बेचने वाले, अस्थायी स्टॉल लगाने वाले और छोटे दुकानदार भी इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, कारोबार में वास्तविक बढ़ोतरी मौसम, लोगों की आवाजाही, स्थान, दुकान की लागत और ग्राहकों की खरीदारी पर निर्भर करती है। इसलिए हर दुकानदार की कमाई एक जैसी नहीं होती।
परिवहन और अन्य सेवाओं की भी बढ़ती भूमिका
दुर्गा पूजा के दौरान प्रतिमाओं, निर्माण सामग्री और सजावट के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए परिवहन की जरूरत होती है। छोटे मालवाहक वाहन, ट्रक, टेंपो और अन्य परिवहन साधनों से जुड़े लोगों को काम मिल सकता है।
इसके अलावा सफाई, सुरक्षा, अस्थायी श्रमिकों की व्यवस्था और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ती है। इस तरह पूजा की तैयारियां कई व्यवसायों को एक-दूसरे से जोड़ती हैं। इसका असर शहर के विभिन्न बाजारों और सेवा क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
आस्था के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का उत्सव
जमशेदपुर की दुर्गा पूजा की खासियत यह है कि इसमें धार्मिक परंपरा के साथ सामुदायिक भागीदारी भी दिखाई देती है। पूजा समितियां पंडाल निर्माण, प्रतिमा, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग लोगों और कारोबारियों से जुड़ती हैं। इससे शहर में आर्थिक गतिविधियों का एक अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण चक्र बनता है।
हालांकि, दुर्गा पूजा से शहर में कुल कितने रुपये का कारोबार होता है, कितने लोगों को रोजगार मिलता है और पिछले वर्षों की तुलना में कितनी वृद्धि हुई है, इसका सटीक आकलन करने के लिए पूजा समितियों, कारोबारियों, बाजार संगठनों और श्रमिकों से आंकड़े जुटाने होंगे। बिना प्रमाणित आंकड़ों के कारोबार को करोड़ों रुपये का बताना उचित नहीं होगा।
इतना जरूर है कि दुर्गा पूजा के अवसर पर होने वाली तैयारियां और खरीदारी स्थानीय अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों को सक्रिय करती हैं। मां दुर्गा के स्वागत में सजते पंडाल केवल श्रद्धा के केंद्र नहीं होते, बल्कि कारीगरों के हुनर, छोटे कारोबारियों की उम्मीदों और मेहनतकश लोगों की आजीविका से भी जुड़े होते हैं।
इसलिए जमशेदपुर की दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक उत्सव के रूप में देखना इसकी व्यापक तस्वीर को अधूरा छोड़ देना होगा। यह आस्था, संस्कृति, कला, रोजगार और कारोबार का ऐसा संगम है, जिसमें मां के स्वागत के साथ शहर की आर्थिक गतिविधियां भी गति पकड़ती हैं।
दुर्गा पूजा से जुड़े प्रमुख कारोबार
1. मूर्ति निर्माण और सजावट
2. पंडाल निर्माण और डिजाइनिंग
3. लाइटिंग और विद्युत सज्जा
4. फूल और पूजा सामग्री
5. कपड़ा, बांस, लकड़ी और अन्य निर्माण सामग्री
6. खानपान और अस्थायी दुकानें
7. परिवहन और माल ढुलाई
8. सफाई, सुरक्षा और अन्य सेवाएं
खास बात:
दुर्गा पूजा का आर्थिक महत्व केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं है। इससे छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारीगरों और अस्थायी कामगारों को भी अतिरिक्त काम और कमाई का अवसर मिल सकता है।












