
- केंद्र सरकार ने उद्योग जगत से मिलाया हाथ, कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार देंगी कौशल प्रशिक्षण; कम से कम 20 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं को कैप्टिव एंप्लायमेंट के तहत नौकरी देने की व्यवस्था
रांची : झारखंड के ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार पाने का नया रास्ता खुल सकता है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने के लिए उद्योग जगत के साथ साझेदारी की है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के दूसरे चरण में 1.83 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के तहत कंपनियां अपनी जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करने और उन्हें नौकरी देने में भागीदारी करेंगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए 50 से अधिक नियोक्ताओं, उद्योग संगठनों, सेक्टर स्किल काउंसिल और विभिन्न राज्यों के अधिकारियों के साथ बातचीत की है। सरकार का जोर ऐसे कौशल विकसित करने पर है, जिनकी उद्योगों में वास्तविक मांग है। इससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, 1.83 लाख रोजगार का लक्ष्य पूरे योजना के दूसरे चरण से संबंधित है। झारखंड के लिए अलग से कितने युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, इसकी जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त होने पर स्पष्ट होगी।
कंपनियों की जरूरत के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण
योजना के तहत युवाओं को केवल सामान्य प्रशिक्षण देने के बजाय कंपनियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कौशल सिखाने पर जोर दिया जाएगा। इससे युवाओं को उद्योगों में काम करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक जानकारी और तकनीकी दक्षता मिल सकेगी।
सरकार का विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, कपड़ा उद्योग, हॉस्पिटैलिटी, खुदरा कारोबार, आइटी, टेलीकॉम और बिजली जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर है। इन क्षेत्रों में युवाओं को मशीन चलाने, उत्पादन, सिलाई, कपड़ा निर्माण, तकनीकी सहायता, ग्राहक सेवा, स्टोर संचालन, बिलिंग, होटल प्रबंधन और हाउसकीपिंग जैसे कामों का प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
जमशेदपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिहाज से ऑटोमोबाइल, विनिर्माण और तकनीकी कार्यों से जुड़े कौशल युवाओं के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, स्थानीय कंपनियों की भागीदारी और झारखंड में प्रशिक्षण केंद्रों की उपलब्धता की पुष्टि संबंधित एजेंसियों से करनी होगी।
कम से कम 20 प्रतिशत युवाओं को नौकरी देने की व्यवस्था
योजना के दूसरे चरण में कैप्टिव एंप्लायमेंट के तहत कम से कम 20 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं को कंपनियों में नौकरी देने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को सीधे रोजगार से जोड़ना है।
इस व्यवस्था में कंपनियां अपनी जरूरतों और भर्ती योजनाओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने तथा उन्हें रोजगार देने में भागीदारी करेंगी। हालांकि, किस कंपनी में कितने युवाओं की भर्ती होगी और उन्हें कौन-सा काम मिलेगा, यह संबंधित कंपनी की जरूरतों और उपलब्ध पदों पर निर्भर करेगा।
इसलिए योजना के तहत प्रशिक्षण मिलने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक प्रशिक्षित युवा को किसी निश्चित कंपनी में नौकरी की गारंटी मिल गई है। रोजगार के अवसर संबंधित कंपनी की भर्ती प्रक्रिया और निर्धारित शर्तों के अनुसार उपलब्ध होंगे।
तीन वर्षों में 500 लोगों को नौकरी देने वाली कंपनियां होंगी पात्र
योजना के तहत कंपनियों की पात्रता के लिए भी शर्तें निर्धारित की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हीं पंजीकृत कंपनियों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने संस्थान या उसकी सहायक कंपनियों में कम से कम 500 लोगों को नौकरी दी हो।
इच्छुक कंपनियों को संबंधित राज्यों की क्रियान्वयन एजेंसियों की ओर से जारी रुचि अभिव्यक्ति (ईओआइ) के तहत आवेदन करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कंपनियों और क्रियान्वयन एजेंसियों को योजना में शामिल किया जाएगा।
कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखना होगा
योजना में केवल प्रशिक्षण देकर औपचारिकता पूरी करने के बजाय वास्तविक रोजगार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। निर्धारित नियमों के अनुसार, कंपनी को प्रशिक्षित युवाओं को कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखना जरूरी होगा।
पात्र कंपनियों और क्रियान्वयन एजेंसियों को निर्धारित काम और उपलब्धियों के आधार पर चार किस्तों में भुगतान किया जाएगा। अंतिम किस्त का भुगतान रोजगार संबंधी शर्तों को पूरा करने के बाद किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण के नाम पर खर्च करने के साथ युवाओं को वास्तविक रोजगार भी मिले और वे नौकरी में निर्धारित अवधि तक बने रहें।
नौकरी के लिए दूसरे शहर या राज्य भी जाना पड़ सकता है
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नौकरी गांव या उसके आसपास ही मिलेगी। रोजगार का स्थान कंपनी की इकाई, काम की प्रकृति और उपलब्ध पदों पर निर्भर करेगा।
जरूरत के अनुसार युवाओं को दूसरे शहरों या राज्यों में भी नौकरी के लिए जाना पड़ सकता है। ऐसे में आवेदन करने वाले युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ नौकरी के स्थान, वेतन, काम की शर्तों और अन्य सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त करनी चाहिए।
झारखंड के युवाओं के लिए क्या है महत्वपूर्ण?
झारखंड में ग्रामीण युवाओं के लिए इस योजना की उपयोगिता राज्य में प्रशिक्षण की उपलब्धता, पात्रता, भर्ती करने वाली कंपनियों और रोजगार के लक्ष्यों पर निर्भर करेगी। कोल्हान सहित राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों और क्रियान्वयन एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
युवाओं को आवेदन करने से पहले योजना की आधिकारिक अधिसूचना, प्रशिक्षण केंद्रों, पात्रता और भर्ती प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। झारखंड में आवेदन की तारीख, जिलावार लक्ष्य और संबंधित कंपनियों की सूची की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इनका विवरण जारी किया जा सकता है।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के कौशल को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। योजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कितने युवाओं को नौकरी मिलती है और वे रोजगार में कितने समय तक बने रहते हैं।












