जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में तेजी से फैल रहे ब्रेन मलेरिया (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नियंत्रण अभियान को नई दिशा देने का निर्णय लिया है। अब केवल मरीजों का इलाज ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन, व्यापक स्क्रीनिंग और घर-घर निगरानी के जरिए संक्रमण की जड़ तक पहुंचने की रणनीति अपनाई जाएगी। इसके लिए महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज को शोध और विश्लेषण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ब्रेन मलेरिया को केवल मौसमी बीमारी मानकर नहीं रोका जा सकता। इसलिए संक्रमण के हॉटस्पॉट, प्रभावित आबादी, जोखिम वाले समूह और फैलाव के पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। शोध से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य के लिए साक्ष्य-आधारित नियंत्रण नीति तैयार की जाएगी।शुक्रवार को जिले में 14,200 संदिग्ध लोगों की जांच की गई, जिसमें 128 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई। इनमें 93 मरीज ब्रेन मलेरिया (पीएफ), 31 सामान्य मलेरिया (पीवी) और चार मिश्रित संक्रमण के पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पोटका, घाटशिला, पटमदा और डुमरिया प्रखंड अभी भी सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में फॉगिंग, एंटी-लार्वा अभियान और विशेष सर्विलांस को तेज कर दिया गया है।
संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले के सभी 58 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्करों (एमपीडब्ल्यू) को भी अभियान में शामिल किया गया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करें, जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार सुनिश्चित करें। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम घर-घर जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करेगी। इधर, पोटका प्रखंड में हाल के दिनों में मलेरिया से हुई मौतों को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने संबंधित 12 चिकित्सा पदाधिकारियों से 24 घंटे के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य समय पर जांच, प्रभावी उपचार, वैज्ञानिक शोध और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जिले में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
