
- टाटा स्टील फाउंडेशन की प्री-मैट्रिक कोचिंग से बदली आदिवासी बेटियों की तकदीर, वेस्ट बोकारो में लगातार आठवें साल 100% रिजल्ट
जमशेदपुर/वेस्ट बोकारो : दूरदराज के बिरहोर टोले से निकलकर मैट्रिक की परीक्षा में डिस्टिंक्शन हासिल करने तक का सफर मुस्कान कुमारी के लिए आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और शैक्षणिक चुनौतियों के बीच मुस्कान ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल कर साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो बेटियां किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के बांजी स्थित प्री-मैट्रिक कोचिंग (पीएमसी) केंद्र की छात्रा मुस्कान की यह उपलब्धि बिरहोर समुदाय की दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन ने ऐसी ही बेटियों की उपलब्धियों को सामने लाया है, जो शिक्षा के दम पर सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पीछे छोड़ अपने भविष्य की नई इबारत लिख रही हैं।
95.2% अंक लाकर स्वाति ने हासिल किया सातवां स्थान
रामगढ़ जिले के सोंडीहा स्थित जय हिंद विद्या निकेतन की छात्रा स्वाति कुमारी ने मैट्रिक परीक्षा में 95.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके साथ ही उन्होंने जिले में सातवां स्थान प्राप्त किया। प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम से जुड़ी स्वाति की सफलता ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए मिसाल है। उनकी उपलब्धि बताती है कि नियमित पढ़ाई, विषयवार मार्गदर्शन और सही शैक्षणिक सहयोग से ग्रामीण प्रतिभाएं भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
वेस्ट बोकारो में लगातार आठवें साल 100% रिजल्ट
टाटा स्टील फाउंडेशन ने वेस्ट बोकारो में 11 प्री-मैट्रिक कोचिंग केंद्रों के माध्यम से कक्षा सातवीं से दसवीं तक के 1,981 विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहयोग दिया। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 तक छह महीने के दौरान विद्यार्थियों को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी की विशेष कोचिंग दी गई।
कार्यक्रम के तहत दसवीं कक्षा में नामांकित सभी 700 विद्यार्थी वार्षिक माध्यमिक बोर्ड परीक्षा 2026 में सफल रहे। इस तरह वेस्ट बोकारो में लगातार आठवें वर्ष 100 प्रतिशत परिणाम का रिकॉर्ड कायम रहा।
564 विद्यार्थियों ने हासिल किया प्रथम श्रेणी का अंक
कार्यक्रम की सफलता केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं रही। कुल 564 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में सफलता हासिल की, जिनमें 287 लड़कियां शामिल हैं। वहीं, 147 विद्यार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर डिस्टिंक्शन हासिल की।
ये आंकड़े बताते हैं कि शैक्षणिक सहयोग मिलने पर लड़कियां भी बेहतर परिणाम हासिल कर उच्च शिक्षा और पेशेवर करियर की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
बिरहोर समुदाय की 13 बेटियों ने हासिल की प्रथम श्रेणी
आदिवासी और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बांजी के मिडिल स्कूल में विशेष प्री-मैट्रिक कोचिंग केंद्र स्थापित किया गया। इस केंद्र के माध्यम से दसवीं कक्षा के 33 विद्यार्थियों को सहायता दी गई और सभी विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में सफल रहे।
इनमें 14 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी के अंक हासिल किए। खास बात यह रही कि प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वालों में 13 लड़कियां शामिल थीं। यह उपलब्धि ऐसे समुदायों में लड़कियों की शैक्षणिक भागीदारी और क्षमता को सामने लाती है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच अब भी चुनौती बनी हुई है।
3,291 विद्यार्थियों को मिला कोचिंग का लाभ
टाटा स्टील फाउंडेशन के प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम ने वित्त वर्ष 2026 में झारखंड और ओडिशा के कुल 3,291 विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की। इनमें से 3,191 विद्यार्थी दसवीं की बोर्ड परीक्षा में सफल रहे। इस तरह कार्यक्रम का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत लगभग 97 प्रतिशत रहा।
कार्यक्रम में कक्षा सातवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों को विषयवार कोचिंग, नियमित मूल्यांकन, मेंटरिंग और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की बुनियादी समझ मजबूत करने के साथ उन्हें पढ़ाई जारी रखने और आगे की शिक्षा के लिए तैयार करना है।
पहली पीढ़ी की छात्राओं के लिए खुल रहे नए रास्ते
कार्यक्रम से लाभान्वित होने वाली कई लड़कियां आदिवासी और वंचित समुदायों से आती हैं तथा अपने परिवार की पहली पीढ़ी की शिक्षार्थी हैं। उनके लिए स्कूल की परीक्षा में सफलता केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ना भी है।
मुस्कान और स्वाति जैसी छात्राओं की उपलब्धियां बताती हैं कि जब बेटियों को शिक्षा, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे अपनी परिस्थितियों से आगे बढ़कर बड़े सपने देख सकती हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन का प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम इसी दिशा में काम करते हुए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की लड़कियों के लिए शिक्षा के नए अवसर तैयार कर रहा है।












