
देवघर : चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करना एक उपलब्धि है, लेकिन मरीजों के प्रति जिम्मेदारी निभाना उससे भी बड़ा दायित्व है। एम्स देवघर के दूसरे दीक्षा समारोह में शनिवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भावी चिकित्सकों को यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय मरीज और उसका परिवार डॉक्टर पर भरोसा करते हैं। इसलिए चिकित्सकों को ज्ञान के साथ निष्ठा, ईमानदारी और करुणा को भी अपने कार्य का आधार बनाना चाहिए।
तकनीक बढ़े, पर मरीज से जुड़ाव बना रहे
उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति जरूरी है, लेकिन वह मानवीय स्पर्श की जगह नहीं ले सकती। मरीज के प्रति संवेदनशील व्यवहार और उसकी तकलीफ समझने की क्षमता चिकित्सा सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने नर्सिंग और पैरामेडिकल विद्यार्थियों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, ये स्वास्थ्य सेवाओं की पहली और अहम कड़ी हैं। बेहतर उपचार व्यवस्था में चिकित्सकों के साथ इन कर्मियों का योगदान भी महत्वपूर्ण है।
पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा एम्स देवघर
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में एम्स जैसे संस्थानों की बड़ी भूमिका है। पहले लोगों को एम्स में उपचार के लिए दिल्ली जाना पड़ता था, जबकि अब देवघर में भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है। उन्होंने एम्स देवघर के चिकित्सा और शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में संस्थान देवघर और झारखंड के साथ पूरे पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। क्षेत्रीय स्तर पर ऐसी संस्थाओं की मौजूदगी आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद करती है।
चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर रखा जोर
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या पहले के 380 से बढ़कर 846 हो गई है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस सीटें 51 हजार से बढ़कर लगभग 1.39 लाख और पीजी सीटें 31 हजार से बढ़कर 86 हजार हो गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को अहम बताया। उनके अनुसार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की बुनियादी जरूरत हैं और एम्स जैसे संस्थान इस लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
छात्राओं की भागीदारी पर खुशी, नशे से दूरी की अपील
चिकित्सा शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती रुचि और संख्या पर उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण का संकेत बताया। विद्यार्थियों से शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान के प्रति आभार जताने को भी कहा। बाबा बैद्यनाथ की नगरी पहुंचने को सौभाग्य बताते हुए उन्होंने उपस्थित लोगों को नशा न करने का संकल्प दिलाया। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी के योगदान को भी याद किया। समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी तथा अन्य जनप्रतिनिधि और संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित रहे।












