
नई दिल्ली : कठिन इलाकों में तैनात जवानों तक समय पर राशन पहुंचाने और उसकी गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए भारतीय सेना ने ‘भारत राइस’ पहल शुरू की है। इसके साथ भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नई व्यवस्था में चावल सीधे सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा। लद्दाख और पूर्वोत्तर के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित डिपो भी इसके दायरे में होंगे। उद्देश्य राशन की आपूर्ति आसान बनाना और जरूरत के समय उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
स्थानीय केंद्रों से राशन जुटाने की प्रक्रिया होगी आसान
मौजूदा व्यवस्था में सैन्य डिपो को स्थानीय FCI केंद्रों से राशन लेने के लिए परिवहन सहित अन्य इंतजाम करने पड़ते हैं। नई पहल के तहत सेना के निर्धारित मानकों के अनुरूप चावल की सीधी आपूर्ति होगी। इससे ढुलाई और वितरण की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026–27 के दौरान चावल की आपूर्ति भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ, यानी NAFED के माध्यम से की जाएगी। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए चावल की जांच भी होगी।
10 और 30 किलो की पैकिंग में मिलेगा चावल
दुर्गम क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चावल 10 किलो और 30 किलो के बैग में उपलब्ध कराया जाएगा। पैकिंग ऐसी रखने पर जोर है, जिससे परिवहन, रखरखाव और भंडारण आसान हो सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पहल की शुरुआत की। राजनाथ सिंह ने इसे किसानों की मेहनत को सैनिकों के कल्याण और सेना की संचालन संबंधी तैयारियों से जोड़ने वाला कदम बताया।
आपात परिस्थितियों में मिलेगा FCI के संसाधनों का सहारा
समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर सेना FCI के गोदामों, आधुनिक साइलो, ढुलाई और रखरखाव के उपकरणों तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद ले सकेगी। इससे राशन और अन्य जरूरी सामग्री को सैन्य अभियानों वाले क्षेत्रों के नजदीक रखने तथा वहां पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी। इस व्यवस्था का विशेष महत्व तब होगा, जब कम समय में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती करनी पड़े और अग्रिम मोर्चों तक लगातार आपूर्ति बनाए रखना जरूरी हो।
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव का भी उल्लेख
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में हथियारों और तकनीक के साथ मजबूत रसद व्यवस्था भी लड़ने की क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भंडारण, परिवहन नेटवर्क और समय पर राशन की भरपाई को उन्होंने जरूरी बताया। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी और कार्रवाई शुरू होने के बीच बहुत कम समय मिल सकता है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती महत्वपूर्ण होगी।
पांच साल प्रभावी रहेगा समझौता
यह समझौता पांच वर्षों तक लागू रहेगा। दोनों पक्षों की सहमति से इसकी अवधि बढ़ाई जा सकेगी। पहल को अंतिम रूप देने के लिए सेना, FCI, NAFED और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच करीब 18 महीनों तक समन्वय किया गया।












