
पटना : बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से कई इलाकों में पानी फैल गया है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रशासन ने राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
13 जिलों में बाढ़ का असर, निचले इलाकों में बढ़ी परेशानी
बाढ़ का असर राज्य के दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर जिलों में दिखाई दे रहा है। कई निचले इलाकों में पानी फैलने से लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। राहत और बचाव कार्य के लिए सरकारी नावों की तैनाती भी की गई है।
पटना में गंगा-सोन-पुनपुन ने बढ़ाई चिंता
पटना में बाढ़ का खतरा खास तौर पर बढ़ गया है। गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है, जबकि दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से 61 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
वहीं, श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर पहुंच गया है। पानी आसपास के घरों तक पहुंचने की स्थिति में है।
इंद्रपुरी बराज से सोन नदी में 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा इलाकों में भी पानी तेजी से फैलने की चिंता बढ़ गई है।
समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर
समस्तीपुर के मोहीउद्दीननगर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 1.50 मीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव बढ़ा है।
भागलपुर में भी गंगा के कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर तेज कटाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे रेलवे के टेगिंग बांध पर भी खतरा पैदा हो गया है। बांध को बचाने के लिए दिन-रात काम चल रहा है और बड़ी संख्या में ट्रैक्टर तथा बालू की बोरियां लगाई जा रही हैं।
सोन के टीलों पर करीब 100 लोग फंसे
रोहतास के नौहट्टा इलाके में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के टीलों पर खेती करने वाले करीब 100 लोग फंस गए हैं। जलस्तर बढ़ने के बाद इन लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ में घर टूटने पर कितना मिलेगा मुआवजा?
बाढ़ से मकान को हुए नुकसान के आधार पर अलग-अलग सहायता राशि का प्रावधान बताया गया है।
- पक्का मकान पूरी तरह ध्वस्त: ₹1.20 लाख
- आंशिक रूप से पक्का मकान क्षतिग्रस्त: ₹6,500
- आंशिक रूप से कच्चा मकान क्षतिग्रस्त: ₹4,000
- झोपड़ी पूरी तरह नष्ट: ₹8,000
- पशुओं का बाड़ा/शेड नष्ट: ₹3,000
- फसल बर्बाद हुई तो भी मिलेगी राहत
बाढ़ में फसल को नुकसान होने पर भी प्रभावित परिवारों को राहत देने का प्रावधान है। सामान्य स्थिति में फसल नुकसान के लिए प्रति परिवार ₹7,000 राहत अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि पानी कम होने के बाद कृषि विभाग फसल और पेड़-पौधों को हुए नुकसान का अंतिम आकलन करेगा। इसके बाद निर्धारित दर के आधार पर सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा।
बाढ़ में मौत पर परिजनों को ₹4 लाख की सहायता
आपदा में किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसके आश्रितों को ₹4 लाख की राहत राशि दिए जाने का प्रावधान है। वहीं अस्पताल में भर्ती होने या अंग क्षति जैसी परिस्थितियों में भी अलग-अलग सहायता का प्रावधान बताया गया है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।


