
सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-33 और NH-32 पर ओवरलोड मालवाहक वाहनों का संचालन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्धारित क्षमता से अधिक आयरन ओर और अन्य खनिजों का परिवहन करने वाले हाईवा और टिप ट्रेलर न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं, बल्कि सड़कों को भी तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई मालवाहक वाहन तय सीमा से कहीं अधिक भार लेकर दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे सड़क पर वाहनों का संतुलन बिगड़ने, ब्रेकिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे बनने से दोपहिया वाहन चालकों और छोटे वाहनों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि नियमित और प्रभावी जांच के अभाव में ओवरलोड वाहन बेखौफ होकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहे हैं। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ओवरलोडिंग पर सख्ती नहीं की गई तो सड़क दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी हो सकती है। उनका सुझाव है कि प्रमुख मार्गों पर स्थायी व मोबाइल वेट ब्रिज के माध्यम से वाहनों की जांच की जाए, क्षमता से अधिक भार मिलने पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों का पंजीकरण निलंबित करने जैसी कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों को बचाने के लिए ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। उनका कहना है कि प्रशासन, परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त अभियान चलाकर इस समस्या पर स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
