
कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पचिसिया को गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। उन पर हत्या के एक आरोपी के परिवार से कथित तौर पर 75 लाख रुपये मांगने, विवादित जमीन को कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम कराने और दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद मामले में कार्रवाई की गई है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
80 लाख की जमीन 18 लाख में कराने का आरोप
मामला करीब 80 लाख रुपये मूल्य की विवादित जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि एजेंट के माध्यम से इस जमीन का सौदा महज 18 लाख रुपये में कराया गया। यह संपत्ति हत्या के एक मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति से संबंधित बताई जा रही है। मामले की जांच आईजी जबलपुर स्तर से कराई गई, जिसमें कई गंभीर आरोप सामने आने का दावा किया गया है।
दो दिन थाने में रखने का आरोप
जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि शिकायतकर्ता रमेश लोधी को रंगनाथ नगर थाने में रखा गया। इसके बाद उसे दो दिनों तक सरकारी आवास में भी रोके जाने का आरोप है। आरोप यह भी है कि जमीन की रजिस्ट्री के दिन उसे सरकारी वाहन से कार्यालय ले जाया गया, ताकि वह किसी अन्य अधिकारी या व्यक्ति से शिकायत न कर सके।
जमीन हस्तांतरण के बाद रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की और नामांतरण रोकने के लिए पटवारी को आवेदन दिया। इसके बाद कथित तौर पर पुराने हत्या के मामले का हवाला देकर उससे 75 लाख रुपये मांगने और बयान बदलवाने का भरोसा देने का आरोप लगाया गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई कार्रवाई
मामले में FIR दर्ज होने के बाद प्रकरण मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए। शुक्रवार को पुलिस की टीम CSP कार्यालय पहुंची और उनके कमरे के साथ स्टाफ रूम को भी सील कर दिया।
अब सील किए गए कार्यालय से दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की जाएगी। मामले में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होने की बात सामने आ रही है।
जांच के बाद साफ होगी आरोपों की सच्चाई
नेहा पचिसिया समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

