
अमृतसर: भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गांवों में नाबालिगों और युवाओं को अपराध, नशा तस्करी तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के कथित नेटवर्क से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस मुहिम में धार्मिक स्थलों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों की सहायता ली जा रही है। सीमावर्ती इलाकों के गुरुद्वारों में शाम के समय लाउडस्पीकर से युवाओं एवं उनके अभिभावकों के लिए सतर्कता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
रहिरास साहिब के पाठ के बाद गूंज रहा अलर्ट
गांवों के गुरुद्वारों में रहिरास साहिब के पाठ की समाप्ति के बाद पुलिसकर्मी लोगों को संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सावधान कर रहे हैं। युवाओं से अपील की जा रही है कि वे नशा तस्करों, संदिग्ध व्यक्तियों और देशविरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों के बहकावे में न आएं।
पुलिस का मानना है कि गुरुद्वारों से दिया जाने वाला संदेश गांव के लगभग हर परिवार तक पहुंच सकता है। धार्मिक मंच से की गई अपील का लोगों पर अधिक असर पड़ने की भी उम्मीद है। यह अभियान अमृतसर के साथ ही पठानकोट, गुरदासपुर और बटाला से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।
पैसों का लालच देकर किशोरों को फंसाने का आरोप
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में पंजाब में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, ग्रेनेड हमलों तथा गैंगस्टर गतिविधियों से संबंधित मामलों में 149 नाबालिग गिरफ्तार किए गए हैं। पूछताछ के दौरान कुछ किशोरों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का सपना दिखाकर अपराध की दुनिया में धकेला गया था।
अधिकारियों का कहना है कि आपराधिक और देशविरोधी नेटवर्क कम उम्र के बच्चों को अपना आसान निशाना बनाते हैं। किशोरों को धन, महंगे सामान और बेहतर जीवन का लालच देकर छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं। बाद में उन्हें गंभीर अपराधों में शामिल कर लिया जाता है। इसलिए अब पुलिस कार्रवाई करने के साथ अपराध को शुरुआती स्तर पर रोकने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील
गुरुद्वारों से प्रसारित संदेश में माता-पिता को बच्चों की दिनचर्या, मित्रों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। बच्चे के व्यवहार में अचानक परिवर्तन, संदिग्ध ऑनलाइन बातचीत, बिना किसी स्पष्ट कारण के महंगे सामान का मिलना अथवा गैंगस्टर संस्कृति के प्रति बढ़ता आकर्षण खतरे का संकेत हो सकता है।
पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने को कहा है।
मंदिरों और चर्चों से भी दिया जाएगा संदेश
इस जागरूकता अभियान को आने वाले दिनों में मंदिरों, चर्चों और दूसरे सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाने की तैयारी है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने पहल का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं को नशे और अपराध से बचाने के लिए परिवार, समाज, धार्मिक संस्थाओं और प्रशासन का एकजुट होना बेहद जरूरी है।
अमृतसर: भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गांवों में नाबालिगों और युवाओं को अपराध, नशा तस्करी तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के कथित नेटवर्क से बचाने के लिए पुलिस ने विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस मुहिम में धार्मिक स्थलों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों की सहायता ली जा रही है। सीमावर्ती इलाकों के गुरुद्वारों में शाम के समय लाउडस्पीकर से युवाओं एवं उनके अभिभावकों के लिए सतर्कता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
रहिरास साहिब के पाठ के बाद गूंज रहा अलर्ट
गांवों के गुरुद्वारों में रहिरास साहिब के पाठ की समाप्ति के बाद पुलिसकर्मी लोगों को संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सावधान कर रहे हैं। युवाओं से अपील की जा रही है कि वे नशा तस्करों, संदिग्ध व्यक्तियों और देशविरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों के बहकावे में न आएं।
पुलिस का मानना है कि गुरुद्वारों से दिया जाने वाला संदेश गांव के लगभग हर परिवार तक पहुंच सकता है। धार्मिक मंच से की गई अपील का लोगों पर अधिक असर पड़ने की भी उम्मीद है। यह अभियान अमृतसर के साथ ही पठानकोट, गुरदासपुर और बटाला से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।
पैसों का लालच देकर किशोरों को फंसाने का आरोप
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में पंजाब में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, ग्रेनेड हमलों तथा गैंगस्टर गतिविधियों से संबंधित मामलों में 149 नाबालिग गिरफ्तार किए गए हैं। पूछताछ के दौरान कुछ किशोरों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का सपना दिखाकर अपराध की दुनिया में धकेला गया था।
अधिकारियों का कहना है कि आपराधिक और देशविरोधी नेटवर्क कम उम्र के बच्चों को अपना आसान निशाना बनाते हैं। किशोरों को धन, महंगे सामान और बेहतर जीवन का लालच देकर छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं। बाद में उन्हें गंभीर अपराधों में शामिल कर लिया जाता है। इसलिए अब पुलिस कार्रवाई करने के साथ अपराध को शुरुआती स्तर पर रोकने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील
गुरुद्वारों से प्रसारित संदेश में माता-पिता को बच्चों की दिनचर्या, मित्रों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। बच्चे के व्यवहार में अचानक परिवर्तन, संदिग्ध ऑनलाइन बातचीत, बिना किसी स्पष्ट कारण के महंगे सामान का मिलना अथवा गैंगस्टर संस्कृति के प्रति बढ़ता आकर्षण खतरे का संकेत हो सकता है। पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने को कहा है।
मंदिरों और चर्चों से भी दिया जाएगा संदेश
इस जागरूकता अभियान को आने वाले दिनों में मंदिरों, चर्चों और दूसरे सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाने की तैयारी है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने पहल का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं को नशे और अपराध से बचाने के लिए परिवार, समाज, धार्मिक संस्थाओं और प्रशासन का एकजुट होना बेहद जरूरी है।

