
जमशेदपुर : वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव को लेकर दक्षिण पूर्व रेलवे ने एक अहम पहल की है। अब इन आधुनिक ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी स्पेयर पार्ट्स खड़गपुर रेलवे वर्कशॉप में ही तैयार किए जाएंगे। रेलवे की इस व्यवस्था से खराब पार्ट्स के लिए दूसरे रेल कोच कारखानों पर निर्भरता घटने और मरम्मत कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
वंदे भारत ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ उनके रखरखाव के लिए जरूरी संसाधनों को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में खड़गपुर वर्कशॉप को स्पेयर पार्ट्स तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
खड़गपुर में तैयार होंगे जरूरी स्पेयर पार्ट्स
नई व्यवस्था के तहत वंदे भारत ट्रेनों के कोच में इस्तेमाल होने वाली सीट, बर्थ और अन्य आवश्यक सामग्री के निर्माण पर काम किया जाएगा। रेलवे प्रशासन की ओर से वर्कशॉप को इससे जुड़े निर्देश दिए गए हैं।
अब तक किसी पार्ट के खराब होने पर उसे दूसरे रेल कोच कारखानों से मंगाने में समय लग सकता था। इससे कभी-कभी मरम्मत प्रक्रिया प्रभावित होती थी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद इस प्रक्रिया को आसान बनाने की उम्मीद है।
ICF, RCF और MCF पर कम होगी निर्भरता
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) जैसे प्रमुख कारखानों से छोटे-छोटे पार्ट्स मंगाने की जरूरत कम हो सकती है।
इसका सीधा असर कोचिंग डिपो में होने वाले रखरखाव के समय पर पड़ सकता है। जरूरी स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध रहने से मरम्मत का काम जल्द पूरा करने में मदद मिलेगी।
टाटानगर में 269 करोड़ की कोचिंग यार्ड योजना
वंदे भारत के रखरखाव को लेकर सिर्फ खड़गपुर ही नहीं, बल्कि टाटानगर में भी बड़ी योजना पर काम प्रस्तावित है। यहां करीब 269 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कोचिंग यार्ड विकसित करने की योजना है।
ट्रेनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर बेहतर रखरखाव सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रस्तावित कोचिंग यार्ड इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
टाटानगर-रांची-हावड़ा रूट को भी मिलेगा फायदा
वर्तमान में दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत टाटानगर, रांची और हावड़ा से कुल पांच वंदे भारत ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। आने वाले समय में इस नेटवर्क पर और वंदे भारत सेवाएं बढ़ाने की योजना भी है।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्पेयर पार्ट्स और अत्याधुनिक रखरखाव सुविधाएं तैयार होने से रेलवे की क्षमता बढ़ सकती है। इसका फायदा ट्रेनों की समय पर मरम्मत, उपलब्धता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, खड़गपुर में स्पेयर पार्ट्स का निर्माण और टाटानगर में प्रस्तावित 269 करोड़ रुपये की कोचिंग यार्ड परियोजना दक्षिण पूर्व रेलवे के वंदे भारत नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण कदम हैं।


