
जमशेदपुर : टाटा स्टील आने वाले वर्षों में सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, वैल्यू-एडेड स्टील, ऊर्जा दक्षता और कम कार्बन वाले स्टील उत्पादन पर भी बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी की रणनीति में जमशेदपुर से लेकर नीलाचल और लुधियाना तक विस्तार के साथ उत्पादन प्रक्रिया को अधिक स्मार्ट और ऑटोमेटेड बनाना शामिल है। टाटा स्टील के जमशेदपुर ऑपरेशन के वाइस प्रेसिडेंट चैतन्य भानु भी लगातार ऊर्जा दक्षता, तकनीकी बदलाव और भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने पर जोर देते रहे हैं।
जमशेदपुर में क्षमता और आधुनिक तकनीक पर जोर
टाटा स्टील ने भारत में विकास के अवसरों को देखते हुए बड़े निवेश की रणनीति बनाई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने करीब 20,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में लगाने का लक्ष्य है। कंपनी वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी भी धीरे-धीरे करीब 50 प्रतिशत तक ले जाने की दिशा में काम कर रही है। जमशेदपुर में टिनप्लेट की क्षमता बढ़ाने के साथ कॉम्बी मिल जैसी परियोजनाओं से स्पेशलिटी और हाई-वैल्यू स्टील का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। भविष्य में ऐसे उत्पादों पर जोर रहेगा, जिनमें सामान्य स्टील की तुलना में बेहतर मार्जिन और बाजार की मांग अधिक हो।
नीलाचल में 4.8 मिलियन टन का बड़ा विस्तार
टाटा स्टील की भविष्य की बड़ी योजनाओं में नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) का विस्तार भी शामिल है। कंपनी के बोर्ड ने पहले चरण में करीब 4.8 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता विस्तार को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य लॉन्ग प्रोडक्ट्स की क्षमता बढ़ाने के साथ निर्माण और रिटेल बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
यह विस्तार पूरा होने के बाद नीलाचल टाटा स्टील के भारत में विकास के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
लुधियाना में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस से बदलेगा उत्पादन मॉडल
पंजाब के लुधियाना में 0.75 मिलियन टन क्षमता वाले स्क्रैप आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) को कंपनी ने अपनी नई रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसका उद्देश्य स्क्रैप आधारित उत्पादन के जरिए कम कार्बन वाला स्टील तैयार करना और उत्तर भारत के ग्राहकों के करीब उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
AI, ऑटोमेशन और कम कार्बन तकनीक पर बड़ा दांव
भविष्य की टाटा स्टील में तकनीक की भूमिका और बढ़ने वाली है। कंपनी उत्पादन प्रक्रियाओं में ऑटोमेशन, डेटा आधारित निर्णय और आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रही है। साथ ही जमशेदपुर में कम कार्बन स्टील बनाने के लिए EASyMelt तकनीक का औद्योगिक प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। कंपनी के अनुसार इस तकनीक से ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 50 प्रतिशत से अधिक कमी की क्षमता है। इसके अलावा जमशेदपुर में वेस्ट-हीट रिकवरी और थर्मल एनर्जी स्टोरेज के प्रयोग से भी ऊर्जा की बचत की जा रही है। एक पायलट परियोजना से सालाना करीब 22,000 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
सिर्फ ज्यादा उत्पादन नहीं, बेहतर और स्मार्ट उत्पादन लक्ष्य
टाटा स्टील की आने वाले समय की रणनीति का मूल संदेश यही है कि कंपनी को सिर्फ ज्यादा स्टील नहीं बनाना है, बल्कि बेहतर गुणवत्ता, ज्यादा वैल्यू, कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्टील तैयार करना है। जमशेदपुर में आधुनिक तकनीक, नीलाचल में क्षमता विस्तार और लुधियाना में EAF जैसे प्रोजेक्ट इस बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं। चैतन्य भानु के नेतृत्व में जमशेदपुर ऑपरेशन में ऊर्जा दक्षता और तकनीकी नवाचार पर जोर इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में टाटा स्टील का उत्पादन मॉडल अधिक ऑटोमेटेड, तकनीक आधारित और पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ होने वाला है।

