
जमशेदपुर : जमशेदपुर में अब कबाड़ को कचरा नहीं, बल्कि कमाई और संसाधन का नया स्रोत बनाने की दिशा में तकनीकी पहल सामने आई है। फेंके गए पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, बैटरी, सोलर पैनल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बहुमूल्य धातुएं निकालने की नई तकनीक पर वैज्ञानिकों ने काम शुरू किया है। इसके जरिए ई-कचरे से लिथियम, सोना और तांबा जैसे महत्वपूर्ण पदार्थों को सुरक्षित तरीके से अलग करने की संभावना बताई गई है।
बेल्डीह क्लब में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘सर्कन-2026’ में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इन तकनीकों का खाका प्रस्तुत किया। द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आइआइएम), टाटा स्टील और सीएसआइआर-एनएमएल के साझा मंच पर आयोजित सम्मेलन में 200 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए।
ई-कचरे में छिपे हैं बहुमूल्य धातुओं के भंडार
सम्मेलन में शहरी खनन यानी अर्बन माइनिंग को लेकर विशेष चर्चा हुई। पारंपरिक तरीके से जमीन के अंदर खनन कर धातु निकालने के बजाय अब शहरों में जमा हो चुके इलेक्ट्रॉनिक कचरे को ही संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीक पर जोर दिया गया।
पुराने मोबाइल फोन, कंप्यूटर, खराब बैटरियां, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद अलग-अलग धातुओं को वैज्ञानिक प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों के बढ़ते उपयोग के बीच पुरानी बैटरियों से लिथियम जैसे महत्वपूर्ण तत्वों की दोबारा प्राप्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे एक ओर ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को महत्वपूर्ण कच्चे माल का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हो सकता है।
स्टील स्लैग और राख से बनेंगे मजबूत मकान
सम्मेलन में स्टील उद्योग से निकलने वाले भारी मलबे यानी स्टील स्लैग और बिजलीघरों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के उपयोग पर भी शोध प्रस्तुत किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इन औद्योगिक अवशेषों को मिलाकर निर्माण सामग्री तैयार की जा सकती है।
इस तकनीक का इस्तेमाल थ्री-डी प्रिंटिंग के जरिए मजबूत और टिकाऊ मकान बनाने में किया जा सकता है। साथ ही इससे सड़क निर्माण में भी उपयोग की संभावना बताई गई है। इससे पारंपरिक गिट्टी और बालू पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि कार्बोनेटेड स्लैग का इस्तेमाल बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने और फसलों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराने में किया जा सकता है। यानी औद्योगिक कचरे का उपयोग निर्माण के साथ कृषि क्षेत्र में भी किया जा सकेगा।
स्टार्टअप ने कबाड़ से बने ईंट-टाइल्स दिखाए
सम्मेलन में विभिन्न स्टार्टअप ने औद्योगिक कचरे से तैयार उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। स्लैगटेक, क्लिमिट्रा, पेविंग प्लस और कार्बन स्ट्रांग जैसे स्टार्टअप ने औद्योगिक कचरे से तैयार ईंट, टाइल्स और पेवर ब्लॉक प्रदर्शित किए।
विशेषज्ञों ने माना कि ऐसी तकनीकों का बड़े स्तर पर व्यावसायिक उपयोग होने पर निर्माण सामग्री के क्षेत्र में औद्योगिक कचरे की भूमिका बढ़ सकती है। इससे कचरे के निस्तारण की समस्या को कम करने के साथ नए उत्पाद और रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
पुराने बैटरियों को फिर उपयोगी बनाने पर जोर
सम्मेलन में इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों को दोबारा उपयोगी बनाने की नई वैज्ञानिक विधि भी प्रस्तुत की गई। बैटरियों के उपयोगी जीवन के बाद उनमें मौजूद महत्वपूर्ण पदार्थों की रिकवरी और पुनर्चक्रण पर विशेषज्ञों ने जोर दिया।
इसके अलावा औद्योगिक कचरे को सीधे उत्पाद में बदलने की तकनीकों पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन में ब्रिटेन, नीदरलैंड और इटली के विशेषज्ञों ने प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों और उनके संभावित औद्योगिक उपयोग से संबंधित जानकारी साझा की।
इस सम्मेलन से यह संकेत मिला कि स्टील उद्योग और शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे को भविष्य में संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में जमशेदपुर में शोध और तकनीकी गतिविधियां तेज हो रही हैं।











