
जमशेदपुर : 25 सितंबर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच ने देशभर में स्वदेशी सप्ताह की शुरुआत की। इसी क्रम में मंच की जमशेदपुर महानगर इकाई ने बिष्टुपुर स्थित कार्यालय में जयंती समारोह आयोजित कर उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं और स्वदेशी समर्थकों ने स्थानीय एवं देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
2 अक्टूबर तक चलेगा घर-घर संपर्क अभियान
कार्यक्रम के दौरान निर्णय लिया गया कि 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। मंच के कार्यकर्ता अपने-अपने नगरों और मोहल्लों में जाकर लोगों को स्वदेशी तथा विदेशी वस्तुओं से संबंधित सूची उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही आम नागरिकों से भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की जाएगी। अभियान का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि उनके दैनिक खरीदारी संबंधी फैसले देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय उद्योगों को सीधे प्रभावित करते हैं।
संपूर्ण विकास से ही मिलेगा सुख और संतोष
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन एवं विचारों पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए मंच के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज सिंह ने उनके एकात्म मानव दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य की आवश्यकताएं केवल शरीर और आर्थिक संसाधनों तक सीमित नहीं होतीं। वास्तविक सुख और संतोष के लिए शरीर के साथ मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलित विकास भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत के विकास को कभी पश्चिमी पूंजीवादी व्यवस्था तो कभी साम्यवादी व्यवस्था के नजरिये से देखने का प्रयास किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत की संस्कृति, जीवन मूल्यों, संसाधनों और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर विकास नीति तैयार करने का विचार दिया।
अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर जोर
गोष्ठी में अंत्योदय के विचार पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब समाज के सबसे कमजोर और अभावग्रस्त व्यक्ति को भी मुख्यधारा में आगे बढ़ने का अवसर मिले। एकात्म मानववाद, अंत्योदय और स्वदेशी दर्शन इसी समावेशी विकास की दिशा दिखाते हैं। मंच के अखिल भारतीय सह पर्यावरण प्रमुख बंदे शंकर सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचारों को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कम आवश्यकताओं, देशप्रेम और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग से व्यक्ति संतोषपूर्ण जीवन जीने के साथ राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सकता है।
‘विकसित भारत का आधार स्वदेशी’
बंदे शंकर सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब भारतीय कंपनियां मजबूत और लाभकारी बनेंगी। इसके लिए नागरिकों को स्वदेश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देनी होगी। कार्यक्रम में अमित मिश्रा, राजपति देवी, शोभा श्रीवास्तव, जेकेएम राजू, राजकुमार साह, किरणजीत कौर, अनिल राय, विनिता शाह, अभिषेक बजाज, राजा राम, संजीत प्रमाणिक, गणेश नायर, शुक्ला हलधर, प्राची, ममता सिंह, एम. भवानी, आभा सिंह, संजना सिंह और रमेश कुमार समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।










