
रांची : झारखंड में कम बारिश और पानी की कमी वाली जमीन को खेती के लायक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। बंजर भूमि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार इस वर्ष झारखंड को 20 करोड़ रुपये की राशि देगी। इस राशि का इस्तेमाल खास तौर पर मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती, छोटे चेकडैम और पौधरोपण जैसे कामों में किया जाएगा। इसका सीधा फायदा पलामू और संताल परगना प्रमंडल के किसानों को मिलने की उम्मीद है।
पिछले साल मिली थी 13 करोड़ की राशि
योजना के तहत राशि प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को पिछले वर्ष मिली 13 करोड़ रुपये की राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र केंद्र को देना होगा। वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। इसके बाद इस वर्ष की राशि मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बंजर भूमि विकास योजना का उद्देश्य ऐसी जमीन का उपयोग बढ़ाना है, जहां सामान्य फसलों की खेती पानी की कमी या मिट्टी की स्थिति के कारण मुश्किल होती है। झारखंड के कई इलाकों में ऐसी जमीन मौजूद है।
पलामू-संताल परगना में मिलेट्स पर जोर
योजना के तहत पलामू और संताल परगना के उन इलाकों में किसानों को सहायता दी जाएगी, जहां औसत से कम बारिश होती है। यहां पानी की कम जरूरत वाली फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इनमें बाजरा, रागी और अन्य मोटे अनाज यानी मिलेट्स शामिल हैं।
राज्य में कम पानी वाली जमीन पर मिलेट्स की खेती किसानों के लिए एक वैकल्पिक कृषि मॉडल बन सकती है। इससे बारिश पर निर्भर किसानों को कम पानी में फसल तैयार करने का विकल्प मिलेगा।
चेकडैम से बढ़ेगी खेतों में नमी
बंजर भूमि विकास के तहत सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि छोटे चेकडैम और पौधरोपण पर भी काम होगा। चेकडैम बनने से बारिश के पानी को रोकने में मदद मिलेगी और आसपास की जमीन में नमी बनी रह सकती है।
कृषि कार्य से जुड़े किसान विकास केंद्र के सहायक वैज्ञानिक संजय मिश्रा के अनुसार, चेकडैम बनने से मिट्टी में नमी बढ़ी है। ऐसी जगहों पर श्रीअन्न के साथ फलदार पौधों की वृद्धि भी बेहतर देखी गई है।
झारखंड में तैयार होगा बंजर भूमि का नया डाटाबेस
राज्य सरकार बंजर भूमि का जिला स्तर पर नया डाटाबेस तैयार करने की भी तैयारी कर रही है। इसके लिए ऐसी जमीन का सर्वे किया जाएगा, जहां मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत नहीं बची है।
गौरतलब है कि पड़ोसी राज्यों में इस तरह की योजनाओं से चेकडैम और पौधरोपण को बढ़ावा मिला है। अब झारखंड में भी बंजर जमीन को खेती और जल संरक्षण से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।











