
रांची : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की जाँच में परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, रांची पुलिस ने अदालत में प्रस्तुत जानकारी में बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा को कनीय विद्युत अभियंता नियुक्ति परीक्षा से जुड़े कथित षड्यंत्र का प्रमुख सूत्रधार बताया है। आरोप है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए और अभ्यर्थियों से इसके बदले लाखों रुपये वसूले गए।
प्रश्नपत्र से परिणाम तक एजेंसी की जिम्मेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने संबंधित एजेंसी को प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक एवं फोटोग्राफिक पहचान दर्ज करने, ओएमआर शीट की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का काम सौंपा था। अंतिम परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया भी एजेंसी की जिम्मेदारियों में शामिल थी। पुलिस का आरोप है कि इन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं तक पहुँच का अनुचित लाभ उठाया गया। तीन जुलाई 2022 को होने वाली परीक्षा से पहले सीलबंद प्रश्नपत्र व्हाट्सएप के माध्यम से लीक किए जाने की बात जाँच में सामने आने का दावा किया गया है।
15 लाख या उससे अधिक रकम लेने का दावा
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित अभिषेक कुमार और अभ्यर्थी पंकज कुमार मंडल से पूछताछ में पुलिस को कथित लेनदेन की जानकारी मिली। उनके बयानों के आधार पर आरोप लगाया गया कि अरुण कुमार और उससे जुड़े लोगों ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 15 लाख रुपये या उससे अधिक लेकर हल किए हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। आरोप यह भी है कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को गोपनीय ठिकानों पर रखकर प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए। पुलिस ने इन दावों का उल्लेख नामकुम थाने में दर्ज कांड संख्या 227/2022 की जाँच में किया है।
इस्तीफे के बाद भी प्रभाव बनाए रखने का आरोप
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू अरुण कुमार का एजेंसी से संबंध है। रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि उसने 26 अगस्त 2019 को निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, जाँच एजेंसी का दावा है कि इसके बाद भी वह कंपनी के महत्वपूर्ण कामकाज में प्रभावी भूमिका निभाता रहा। तत्कालीन आयोग अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए पुलिस ने कहा है कि वह एजेंसी के वर्तमान निदेशक अजित कुमार के साथ परीक्षा संबंधी उच्चस्तरीय गोपनीय बैठकों में शामिल होता था।
मुंबई से गिरफ्तारी, अन्य अनियमितताओं की भी जाँच
रिपोर्ट के अनुसार, रांची पुलिस ने अरुण कुमार को सात अगस्त 2026 को मुंबई से गिरफ्तार किया था। बाद में जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर और अन्य अनियमितताओं से जुड़े प्रकरण में भी उसकी भूमिका जाँच के दायरे में आई। सीआईडी द्वारा उसे संबंधित मामले में आरोपित बनाए जाने और पूछताछ किए जाने का भी उल्लेख है। ये विवरण पुलिस के दावों और उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित हैं; आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है।












