
रांची : झारखंड का अपना डेयरी ब्रांड ‘मेधा’ बड़े बाजार तक पहुंच बनाने की संभावनाएं रखता है, लेकिन इस संभावना को मजबूत कारोबार में बदलने के लिए दूध संग्रह से लेकर बिक्री तक कई मोर्चों पर काम करने की जरूरत है। पड़ोसी बिहार के स्थापित ब्रांड ‘सुधा’ से तुलना में अनुभव, वितरण नेटवर्क और उपभोक्ताओं तक पहुंच का अंतर सामने आता है। मेधा के विस्तार का सवाल किसानों की आय और स्थानीय डेयरी अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है।
पुराने भरोसे के सामने नई पहचान की चुनौती
सुधा के पीछे चार दशक से अधिक का अनुभव है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन की स्थापना 1983 में हुई थी। लंबे समय में विकसित किसान नेटवर्क, प्रसंस्करण व्यवस्था और बिक्री केंद्रों ने इसकी पहचान मजबूत की। दूसरी ओर, मेधा अपेक्षाकृत युवा ब्रांड है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, झारखंड मिल्क फेडरेशन की शुरुआत 2014 के बाद हुई और रांची का मुख्य संयंत्र 2016 में पूरी तरह चालू हुआ। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के तकनीकी सहयोग से विकसित इस व्यवस्था को अभी अपनी पहुंच और मजबूत करनी है।
गांवों तक संग्रह व्यवस्था बढ़ाना जरूरी
मेधा की प्रगति के लिए ज्यादा दूध उत्पादकों को संगठित नेटवर्क से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। दूरदराज के गांवों में संग्रह केंद्र, दूध ठंडा रखने की सुविधा और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था बढ़ने से नियमित खरीद को बल मिल सकता है। किसानों को समय पर भुगतान और प्रोत्साहन राशि मिलना भी भरोसा बनाए रखने की शर्त है। पारदर्शी व्यवस्था से उत्पादकों का जुड़ाव बढ़ेगा और निजी खरीदारों पर उनकी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
शहरों में उपलब्धता से बनेगा ग्राहक आधार
उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी आसानी से उपलब्धता भी बिक्री तय करती है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग जैसे शहरों में मोहल्लों तथा आवासीय परिसरों तक बिक्री केंद्रों का विस्तार उपयोगी हो सकता है। सुबह की आपूर्ति में नियमितता जरूरी है। दूध समय पर नहीं मिलने पर ग्राहक दूसरे विकल्प चुन लेते हैं। इसलिए परिवहन, भंडारण और दुकानों तक पहुंचाने की व्यवस्था में तालमेल आवश्यक है।
उत्पादों में विविधता और बेहतर प्रस्तुति पर जोर
दूध-दही के साथ पनीर, घी, मक्खन, फ्लेवर्ड मिल्क और मिठाइयों जैसे उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना बाजार विस्तार का रास्ता हो सकता है। आकर्षक पैकेजिंग, स्पष्ट जानकारी और उपयुक्त भंडारण भी ग्राहक का भरोसा बढ़ाते हैं।
स्थानीय जुड़ाव को कारोबार की ताकत बनाना होगा
झारखंड की संस्कृति, पर्व-त्योहार और दूध उत्पादक किसानों की मेहनत को प्रचार में जगह देने से ब्रांड का स्थानीय रिश्ता मजबूत हो सकता है। हालांकि, स्थायी सफलता नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता और बेहतर सेवा से ही मिलेगी। मेधा के लिए अगला कदम किसानों और ग्राहकों, दोनों के भरोसे को मजबूत करना होगा।












