
धनबाद : बारामुड़ी में खटाल हटाने की कार्रवाई के विरोध में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव खुलकर सामने आए हैं। बुधवार को धनबाद पहुंचे सांसद ने खटाल संचालकों का समर्थन करते हुए जिला प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में जमीन की कीमत बढ़ने के कारण उसे भू-माफिया के हवाले करने की कोशिश हो रही है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष शामिल नहीं है।
जमीन के साथ रोजी-रोटी और पहचान का सवाल
पप्पू यादव ने कहा कि खटाल संचालकों की परेशानी को केवल जमीन के विवाद तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यहां रहने वाले परिवारों की आजीविका, सामाजिक पहचान और संस्कृति भी इससे जुड़ी है। उन्होंने दावा किया कि लोग लंबे समय से इस इलाके में रह रहे हैं और उन्हें उनके अधिकारों से बेदखल नहीं होने दिया जाएगा। सांसद ने स्पष्ट किया कि खटालों में केवल यादव समुदाय के लोग नहीं रहते। आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक परिवार भी यहां बसे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से प्रभावित लोगों की आवाज उठाने की अपील की और कहा कि जनता से जुड़े सवालों पर सबको साथ आना चाहिए।
मुख्यमंत्री से बातचीत और आश्वासन मिलने का दावा
मामले के समाधान को लेकर पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस विषय में पहल करने का आश्वासन दिया है। सांसद के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी उनकी चर्चा हुई है। उन्होंने खटाल संचालकों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को संबंधित स्तरों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर वह धनबाद से रांची तक पैदल मार्च करेंगे। उन्होंने निरसा विधायक अरूप चटर्जी से भी बातचीत करने की बात कही।
भाजपा पर निशाना, केंद्र से रॉयल्टी का सवाल
खटाल विवाद पर भाजपा की भूमिका को लेकर भी सांसद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता कांग्रेस और हेमंत सरकार को बेवजह जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनके अनुसार, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय प्रभावित परिवारों के हितों पर ध्यान देना जरूरी है। पप्पू यादव ने झारखंड की रॉयल्टी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर राज्य का हक रोकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन और कांग्रेस इस सवाल को पहले भी उठाते रहे हैं।
अन्य मुद्दों पर भी रखी अपनी बात
बातचीत के दौरान सांसद ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। उन्होंने नाम हटाए जाने संबंधी दावों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए धार्मिक मंचों से बोलने वालों के लिए मानदंड और आचार संहिता बनाने की बात कही। बारामुड़ी मामले पर उन्होंने दोहराया कि प्रभावित परिवारों की आजीविका और सम्मान की रक्षा के लिए वह उनके साथ खड़े रहेंगे।












