
- प्रधानमंत्री पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मंगलवार को पांकी विधायक समर्थकों के साथ पहुंचे थे मोबाइल दुकान और घर, हंगामे के बाद व्यवसायियों में नाराजगी; बुधवार को बंद रखीं दुकानें
पलामू : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर लेस्लीगंज में शुरू हुआ विवाद अब सड़कों से होते हुए बाजार तक पहुंच गया है। मंगलवार को पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता और उनके समर्थकों की ओर से मुख्य बाजार स्थित मां काली मोबाइल दुकान और दुकानदार के घर पर किए गए हंगामे के विरोध में बुधवार को व्यवसायियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। आम दिनों में ग्राहकों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले बाजार में बुधवार को सन्नाटा पसरा रहा। दुकानों के शटर गिरने से व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित रहीं।
विधायक के विरोध में व्यवसायियों की एकजुटता
मंगलवार की घटना के बाद से ही स्थानीय व्यापारियों के बीच नाराजगी देखी जा रही थी। बुधवार को दुकानें बंद रखकर व्यवसायियों ने अपना विरोध जाहिर किया। बाजार बंदी ने यह साफ संकेत दिया कि व्यापारी वर्ग इस घटना से नाराज है। हालांकि, बंदी को लेकर किसी संगठन की ओर से औपचारिक आह्वान किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसी मामले को लेकर मंगलवार को पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता अपने समर्थकों के साथ लेस्लीगंज मुख्य बाजार पहुंचे थे। यहां मां काली मोबाइल दुकान और दुकानदार के घर पर हंगामा हुआ। इस घटना के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया।
व्यापारियों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
व्यवसायियों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि किसी सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति होने की स्थिति में कानूनी रास्ता अपनाया जाना चाहिए। शिकायत दर्ज कराकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा सकती है, लेकिन किसी दुकान और घर तक पहुंचकर हंगामा करने से व्यापारियों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उनका मानना है कि विरोध का तरीका भी कानून और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए।
अब प्रशासन की भूमिका पर टिकी नजरें
बाजार बंदी के बाद अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणी की जांच और कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए, लेकिन किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की छूट कैसे मिल सकती है? फिलहाल बुधवार को बाजार बंद रहने से लेस्लीगंज में इस विवाद का असर साफ दिखाई दिया। अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।












