
सरायकेला/चांडिल ; संगठन का विस्तार, मजदूरों के अधिकार और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा के मुद्दे पर झारखंड श्रमिक संघ ने अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। चांडिल क्षेत्र में टाटा-रांची मार्ग स्थित होटल सोहराई में हुई बैठक में संगठन को मजबूत बनाने और नई समिति के गठन पर चर्चा हुई। प्रफुल सिंह मुंडा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में केंद्रीय महासचिव शैलेंद्र मेथी, रिजु माझी सहित अन्य नेता शामिल हुए।
नई समिति की तैयारी, तीन माह में पूर्ण चुनाव
बैठक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और सदस्यों सहित संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने पर विचार किया गया। सदस्यता बढ़ाने और अधिक मजदूरों को संघ से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि एडहॉक कमेटी का पूर्ण चुनाव तीन माह के भीतर कराया जाएगा। नेताओं ने कहा कि मजदूरों की आवाज प्रभावी ढंग से उठाने के लिए संगठन में एकजुटता, अनुशासन और मजबूत नेतृत्व जरूरी है। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन के विस्तार की तैयारियों पर चर्चा की।
जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को बताया मूल सवाल
केंद्रीय महासचिव शैलेंद्र मेथी ने कहा कि अलग झारखंड राज्य का आंदोलन यहां के संसाधनों और लोगों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा था। उनके अनुसार, राज्य बनने के बाद भी जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने जंगलों की कटाई, जलस्रोतों के प्रदूषण और वन्यजीवों की सुरक्षा पर चिंता जताई। मेथी ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों के साथ जमीन, जंगल और पानी बचाने की लड़ाई भी जारी रखी जाएगी। उन्होंने झारखंड आंदोलन में श्रमिकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों की भागीदारी का उल्लेख किया।
मुआवजे और पेंशन व्यवस्था पर उठाए सवाल
मेथी ने आरोप लगाया कि औद्योगिक विकास और परियोजनाओं से प्रभावित कई परिवार अब भी उचित मुआवजे के लिए परेशान हैं। स्वर्णरेखा परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने मुआवजा वितरण में बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाए।.उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में लाभार्थियों को मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा बिचौलिये ले लेते हैं। वृद्धा और विधवा पेंशन की प्रक्रिया में परेशानियों का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
श्रमिक अधिकार और पानी की समस्या पर नाराजगी
श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध करते हुए मेथी ने कहा कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। उन्होंने कुछ नौकरशाहों पर राज्य सरकार की छवि खराब करने और लोगों को न्याय देने के बजाय परेशान करने का आरोप भी लगाया। सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के बावजूद कई इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर लोग और मवेशी तालाब तथा छोटे जलस्रोतों पर निर्भर हैं। उन्होंने उद्योगों से होने वाले जल प्रदूषण पर भी चिंता जताई और मजदूरों तथा स्थानीय लोगों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।












