
जमशेदपुर : टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए अपनी कमाई में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की है। जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ कंपनी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में उसका समेकित EBITDA 20,035 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 21 प्रतिशत अधिक है। चुनौतीपूर्ण वैश्विक कारोबारी माहौल और कच्चे माल की बढ़ती लागत के बावजूद कंपनी ने अपनी कमाई में यह इजाफा दर्ज किया है।
कंपनी के अनुसार, पहली छमाही में कुल समेकित राजस्व 1,26,231 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन करीब 16 प्रतिशत पर बना रहा। दूसरी तिमाही में समेकित राजस्व 65,436 करोड़ रुपये और EBITDA 10,665 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 14 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
भारतीय कारोबार बना कमाई का सबसे बड़ा आधार
टाटा स्टील के वित्तीय प्रदर्शन में भारतीय कारोबार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत से कंपनी को 79,641 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि EBITDA 20,541 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस दौरान EBITDA मार्जिन 26 प्रतिशत रहा और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले EBITDA में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी तिमाही में भारत का राजस्व सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 42,653 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5,055 करोड़ रुपये रहा। भारतीय कारोबार में उत्पादन और बिक्री दोनों में तेजी देखने को मिली। दूसरी तिमाही में क्रूड स्टील उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़कर 61.8 लाख टन और डिलीवरी 16 प्रतिशत बढ़कर 59.8 लाख टन हो गई।
ऑटोमोबाइल और स्पेशल प्रोडक्ट्स की बिक्री में रिकॉर्ड
कंपनी के ऑटोमोबाइल एवं स्पेशल प्रोडक्ट्स कारोबार ने भी दूसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। इस क्षेत्र में करीब 11 लाख टन की अब तक की सर्वश्रेष्ठ दूसरी तिमाही की बिक्री दर्ज की गई। हाई-एंड उत्पादों की बिक्री में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, टाटा टिस्कॉन की बिक्री पिछले 12 महीनों में करीब 27 लाख टन तक पहुंच गई। कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म आशियाना और DigECA का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) भी सालाना आधार पर 50 प्रतिशत बढ़कर 2,961 करोड़ रुपये हो गया।
यूरोप में सुधार, ब्रिटेन में चुनौतियां बरकरार
यूरोपीय कारोबार में नीदरलैंड ने बेहतर प्रदर्शन किया। वहां दूसरी तिमाही में 1,395 मिलियन यूरो का राजस्व और 72 मिलियन यूरो का EBITDA दर्ज किया गया। डायरेक्ट शीट प्लांट दोबारा शुरू होने और अपनी निर्धारित उत्पादन क्षमता पर लौटने से कंपनी को फायदा मिला।
हालांकि, ब्रिटेन के कारोबार में कमजोर मांग और बाजार में आयातित स्टील की अधिक उपलब्धता के कारण दबाव बना हुआ है। दूसरी तिमाही में ब्रिटेन का राजस्व 411 मिलियन पाउंड रहा। कंपनी के मुताबिक, वहां इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) परियोजना का निर्माण कार्य भी आगे बढ़ रहा है।
छह महीने में 6,860 करोड़ का पूंजीगत निवेश
टाटा स्टील ने विस्तार और आधुनिकीकरण की योजनाओं पर भी निवेश जारी रखा है। कंपनी ने दूसरी तिमाही में करीब 3,280 करोड़ रुपये और पहली छमाही में कुल 6,860 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया। प्रमुख परियोजनाओं में नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड की 4.8 MTPA क्षमता विस्तार योजना, 0.7 MTPA की हॉट रोल्ड पिकलिंग एंड गैल्वनाइजिंग लाइन और टिनप्लेट की 3 लाख टन क्षमता विस्तार परियोजना शामिल हैं।
91,423 करोड़ रुपये पर पहुंचा नेट कर्ज
मजबूत कमाई के बावजूद कंपनी के सामने कर्ज प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है। सितंबर 2026 तक टाटा स्टील का नेट डेट 91,423 करोड़ रुपये रहा। नेट डेट और EBITDA का अनुपात 2.4 गुना दर्ज किया गया। हालांकि, कंपनी के पास 40,076 करोड़ रुपये की मजबूत लिक्विडिटी उपलब्ध है, जिसमें करीब 10,300 करोड़ रुपये नकद और नकद समकक्ष शामिल हैं।
प्रबंधन ने बताई बेहतर प्रदर्शन की वजह
टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे माल की ऊंची कीमतों के बावजूद कंपनी ने बेहतर डिलीवरी और कमाई दर्ज की है। भारतीय कारोबार में मजबूत बाजार उपस्थिति, ग्राहकों के साथ बेहतर संपर्क और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती से प्रदर्शन को सहारा मिला है। वहीं, कंपनी के कार्यकारी निदेशक एवं सीएफओ कौशिक चटर्जी ने बताया कि लागत में करीब 1,793 करोड़ रुपये की बचत की गई है। पूरे वित्त वर्ष में 7,140 करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी का फोकस लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और नकदी प्रवाह को मजबूत बनाने पर है।












