
- 25 साल पूरे होने पर सिल्वर जुबली समारोह के तहत अनूठी पहल, सिनेमा हॉल में पॉपकॉर्न और मुस्कान के बीच बच्चों ने बिताए यादगार पल
जमशेदपुर : किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ा उपहार है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए अनुराग फाउंडेशन ने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक खास पहल की। संस्था की ओर से पीजेपी सिनेपोलिस में फिल्म ‘रामायण’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान बच्चों ने सिनेमा के पर्दे पर भगवान राम की कथा का आनंद लिया और रोजमर्रा की परेशानियों से दूर अपनों के साथ कुछ यादगार पल बिताए।
अस्पताल और दवाइयों की दुनिया से बाहर खुशियों का एक दिन
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की जिंदगी नियमित रूप से रक्त चढ़ाने, दवाइयों और अस्पतालों के चक्कर के बीच गुजरती है। बीमारी का असर केवल बच्चों पर ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता की दिनचर्या और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। ऐसे में फाउंडेशन ने इन परिवारों को कुछ घंटे खुशियों के साथ बिताने का अवसर दिया।
फिल्म प्रदर्शन के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। पर्दे पर भगवान राम, माता सीता, रावण और वीर जटायु के किरदारों ने बच्चों को आकर्षित किया। पॉपकॉर्न, हंसी-मजाक और सिनेमा के रोमांच ने इस आयोजन को उनके लिए यादगार बना दिया।
25 वर्षों की सामाजिक सेवा का जश्न, सिल्वर जुबली पर खास पहल
अनुराग फाउंडेशन अपनी स्थापना के 25 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर सिल्वर जुबली मना रहा है। इसी अवसर पर संस्था ने सामाजिक सरोकार को केंद्र में रखते हुए इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। उद्देश्य सिर्फ फिल्म दिखाना नहीं, बल्कि उन बच्चों और परिवारों को खुशियों के कुछ पल देना था, जो हर दिन बीमारी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
पदाधिकारियों ने मिलकर संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में फाउंडेशन की ट्रस्टी सुमिता नूपुर सिंह और मृदुला राजे मौजूद रहीं। अध्यक्ष विजयलक्ष्मी दास के साथ कार्यवाह सुकन्या दास, प्राची राजे और जपलीन कौर ने आयोजन में विशेष योगदान दिया। वहीं समिति की ओर से कंचन सिंह, हर्षा, नविता, मंगल शाह, रश्मि और गीता भी उपस्थित रहीं।
इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामाजिक सेवा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशी के कुछ पल जोड़ना भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है। थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों के लिए रामायण फिल्म का यह विशेष प्रदर्शन इसी संवेदनशील सोच की खूबसूरत मिसाल बन गया।












