
रांची : धनतेरस के साथ राजधानी में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स तक की खरीदारी के लिए बाजार तैयार हैं। दुकानों में सजावट और ग्राहकों की आवाजाही से त्योहार का उत्साह दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस धनतेरस रांची में 700 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी होने का अनुमान है। हालांकि, कारोबार का वास्तविक आंकड़ा बिक्री के बाद ही सामने आएगा।
शाम को धन्वंतरि और लक्ष्मी-गणेश की पूजा
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर मनाए जाने वाले धनतेरस को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है। इस दिन नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। लोग अपनी जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार आभूषण, बर्तन तथा घरेलू सामान घर लाते हैं। आचार्य पंडित प्रणव मिश्रा के अनुसार, भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाएगी। रांची के लिए बताए गए समय के मुताबिक, शाम 6:03 से 7:59 बजे तक वृष लग्न में पूजा का मुहूर्त है। इसके बाद सात नवंबर को नरक चतुर्दशी और आठ नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।
सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का अलग समय
खबर में दिए गए मुहूर्त के अनुसार, सोना-चांदी और आभूषण खरीदने के लिए शाम 5:07 से 7:03 बजे तक का समय बताया गया है। बर्तनों की खरीदारी के लिए शाम 5:07 से रात 9:16 बजे तक का समय दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सुबह 8:39 से 10:02 बजे, फिर 11:26 से दोपहर 12:49 बजे और दोपहर 3:30 से शाम 5:07 बजे तक के समय बताए गए हैं। वाहन खरीदने के लिए सुबह 10:44 बजे, दोपहर 12:31 बजे अथवा दोपहर 3:30 से शाम 5:07 बजे तक का उल्लेख है। ये समय रांची के संदर्भ में दिए गए हैं।
डेढ़ रुपये के दीये से हजारों की सजावट तक
दीपावली की तैयारी में पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग बनी हुई है। सामान्य दीया लगभग डेढ़ रुपये प्रति पीस मिल रहा है, जबकि डिजाइनर दीयों की कीमत 10 रुपये से शुरू है। दुकानदारों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में सामान्य दीयों की कीमत करीब 50 पैसे बढ़ी है।इलेक्ट्रिक लाइट की शुरुआती कीमत 40 रुपये है। झालर 150 से 1,500 रुपये तक और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं 200 से 5,000 रुपये तक उपलब्ध हैं। रंगोली के रंग और डिजाइन बनाने वाले सांचे भी खरीदे जा रहे हैं।
रोशनी के साथ जुड़ी है आस्था
चर्च रोड के पूजा सामग्री विक्रेता मुन्ना सिंह के अनुसार, सजावट के लिए इलेक्ट्रिक लाइट लेने के बावजूद मिट्टी के दीयों की मांग बरकरार है। पूजा में घी का दीपक और घर के बाहर तेल के दीये जलाने की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं में दीपक को पवित्रता, आशा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी आस्था और खरीदारी के उत्साह से राजधानी का त्योहार बाजार रोशन है।












