
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी सीजीएल परीक्षा से जुड़े विवाद में अब सभी की निगाहें झारखंड हाई कोर्ट पर टिकी हैं। परीक्षा और इसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला आना है। उपलब्ध खबर के मुताबिक, शुक्रवार, 6 नवंबर को निर्णय सुनाया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 2,300 चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पिछले महीने फैसला सुरक्षित रखा था। चयनित अभ्यर्थियों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की भी इस मामले पर नजर है।
जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने लिया था निर्णय
राज्य सरकार ने सीआईडी की जांच रिपोर्ट और छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए सीजीएल परीक्षा प्रक्रिया तथा सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल इस निर्णय का प्रमुख आधार बने।
सरकार के इसी कदम के खिलाफ सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव और अन्य ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाओं में सरकारी निर्णय को अनुचित बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। अब अदालत को इस विवाद में अपना निर्णय सुनाना है।
अभ्यर्थियों की दलील—पूरी प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा। उनका तर्क था कि कुछ अभ्यर्थियों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि जिन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता से परीक्षा उत्तीर्ण की है, उन्हें दूसरे लोगों की कथित गलतियों का नुकसान नहीं उठाना चाहिए। यदि किसी ने गड़बड़ी की है तो कार्रवाई संबंधित व्यक्ति के खिलाफ होनी चाहिए। उनके मुताबिक, बिना ठोस आधार के सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक समान मानना न्यायसंगत नहीं होगा।
करीब 465 संदिग्ध अभ्यर्थियों का भी उठा मुद्दा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह बात रखी गई कि जांच में लगभग 465 संदिग्ध अभ्यर्थियों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए गए हैं। उनकी दलील थी कि इससे संदिग्ध और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना संभव दिखाई देता है। इसी आधार पर उन्होंने पूरी प्रक्रिया समाप्त करने के बजाय कथित गड़बड़ी में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग रखी।
फैसले से स्पष्ट होगी आगे की स्थिति
यह विवाद परीक्षा की विश्वसनीयता और चयनित अभ्यर्थियों के हितों, दोनों से जुड़ा है। सरकार के निर्णय तथा उसे चुनौती देने वाली दलीलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत का आदेश सामने आने के बाद ही परीक्षा और नियुक्तियों की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल उपलब्ध खबर में निर्णय सुनाए जाने की सूचना है, फैसले का परिणाम नहीं।












