
- दो साल पहले जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों ने दिया था प्रतिमा स्थापित कराने का भरोसा, बेटे की शहादत को सम्मान दिलाने के लिए वृद्ध पिता पहुंचे उपायुक्त के दरबार; ग्रामीणों ने भी उठाई आवाज
नीलाम्बर पिताम्बरपुर (पलामू) : देश की रक्षा और कर्तव्य निभाते हुए नक्सलियों की गोली का शिकार होकर शहीद हुए झारखंड पुलिस के जवान सुकन राम की यादें आज भी उनके परिवार और गांव के लोगों के दिलों में जिंदा हैं। लेकिन शहादत के करीब दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी स्मृति में प्रतिमा स्थापित करने का सपना पूरा नहीं हो सका है। बेटे की शहादत को स्थायी सम्मान दिलाने की उम्मीद लेकर शुक्रवार को उनके वृद्ध पिता अमरजीत मांझी परिजनों और ग्रामीणों के साथ पलामू उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे।
बेटे की शहादत के बाद मिला था भरोसा, दो साल बाद भी इंतजार
परिवार की पीड़ा सिर्फ बेटे को खोने की नहीं, बल्कि उससे जुड़े सम्मान के वादे के अब तक पूरा नहीं होने की भी है। परिजनों के मुताबिक, जब शहीद सुकन राम का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा था, उस समय क्षेत्र के विधायक, जनप्रतिनिधियों और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उनकी स्मृति में प्रतिमा स्थापित कराने का आश्वासन दिया था।
उस वक्त परिवार को लगा था कि जल्द ही गांव में शहीद के नाम और बलिदान की पहचान कायम होगी। लेकिन लगभग दो साल बीतने के बाद भी प्रतिमा स्थापना की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी। इसी अधूरी मांग को लेकर अब शहीद के पिता ने एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
फरवरी 2024 में नक्सलियों ने घात लगाकर किया था हमला
शहीद सुकन राम फरवरी 2024 में चतरा जिले के जोरी थाना क्षेत्र में पुलिस टीम के साथ अभियान पर निकले थे। पुलिस टीम पोस्ता की अवैध खेती को नष्ट करने गई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने जवानों पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी।
अचानक हुए इस हमले में झारखंड पुलिस के जवान सुकन राम शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर से पैतृक गांव सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई थी। एक परिवार ने अपना बेटा खोया तो क्षेत्र ने एक ऐसे जवान को खो दिया, जिसने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
जनता दरबार में वृद्ध पिता की एक ही मांग
शुक्रवार को अमरजीत मांझी अपने परिजनों और ग्रामीणों के साथ पलामू उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे। उन्होंने उपायुक्त के समक्ष बेटे की स्मृति में प्रतिमा स्थापित कराने की मांग रखी। परिवार की इच्छा है कि गांव में ऐसी प्रतिमा स्थापित हो, जो आने वाली पीढ़ियों को सुकन राम की बहादुरी और शहादत की याद दिलाती रहे।
परिजनों का मानना है कि प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की एक संरचना नहीं होगी, बल्कि यह उस बलिदान की पहचान होगी, जिसे उनका परिवार और पूरा समाज हमेशा याद रखना चाहता है।
ग्रामीणों ने भी बुलंद की आवाज, प्रशासन से जल्द पहल की मांग
शहीद के पिता की इस मांग को ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला। जनता दरबार में तरहसी पंचायत के भावी मुखिया प्रत्याशी गोपाल प्रसाद, पंचायत के उपमुखिया सह भावी मुखिया प्रत्याशी सुधीर यादव, रामदेव साह और हीरा मियां सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने एक स्वर में शहीद सुकन राम की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग का समर्थन किया और जिला प्रशासन से इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी शहीद की प्रतिमा
ग्रामीणों का कहना है कि सुकन राम की शहादत पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उनकी प्रतिमा स्थापित होने से गांव के युवाओं को देशसेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर भी शहीद के बलिदान को स्थायी पहचान मिल सकेगी।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की पहल पर टिकी हैं। वृद्ध पिता की उम्र बढ़ रही है, लेकिन बेटे की स्मृति को सम्मान दिलाने की उनकी उम्मीद आज भी कायम है। परिवार और ग्रामीण चाहते हैं कि दो साल पहले मिला आश्वासन अब धरातल पर उतरे और शहीद सुकन राम को उनकी शहादत के अनुरूप सम्मान मिले।
सवाल यही है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवान की प्रतिमा के लिए उसके वृद्ध पिता को आखिर कब तक दर-दर की गुहार लगानी पड़ेगी?












