
जमशेदपुर : शुक्रवार शाम मानगो पुल से गुजरने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। शहर के इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने से आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। दोपहिया से लेकर चारपहिया वाहन तक लंबी कतारों में फंसे नजर आए। गाड़ियां इतनी धीमी गति से आगे बढ़ रही थीं कि पुल पार करना भी वाहन चालकों के लिए परेशानी बन गया। अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंचने की उम्मीद लेकर निकले लोगों का काफी समय रास्ते में ही बीत गया।
करीब आधे घंटे से जाम में फंसी गाड़ियां
शुक्रवार शाम सामने आई जानकारी के अनुसार, मानगो पुल पर करीब आधे घंटे से जाम की स्थिति बनी हुई थी। वाहनों की कतार बढ़ने के साथ यातायात की रफ्तार लगातार धीमी पड़ गई। कहीं गाड़ियां कुछ दूर आगे बढ़तीं, तो अगले ही पल फिर रुक जातीं। इस कारण पुल से गुजरने वाले लोगों को बार-बार इंतजार करना पड़ा। जाम का असर केवल बड़े वाहनों तक सीमित नहीं रहा। बाइक और स्कूटी सवार भी भीड़ के बीच फंस गए। आगे निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने से दोपहिया चालकों को भी कतार के साथ धीरे-धीरे बढ़ना पड़ा।
मानगो से साकची तक आने-जाने में परेशानी
इस जाम से मानगो और साकची के बीच आवाजाही करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। काम के सिलसिले में निकले लोगों के साथ नौकरीपेशा यात्रियों को भी पुल पर रुकना पड़ा। शहर के दूसरे हिस्सों की ओर जा रहे राहगीरों के सफर में भी देरी हुई। मानगो पुल दोनों इलाकों के बीच आवाजाही का महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। ऐसे में पुल पर यातायात बाधित होने का असर आसपास के मार्गों पर भी पड़ता है। शुक्रवार शाम भी वाहनों की लगातार बढ़ती कतार ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
व्यस्त समय में बढ़ी सफर की चुनौती
शाम के व्यस्त समय में जाम लगने से सामान्य दूरी तय करने में भी अपेक्षा से अधिक वक्त लगा। पुल पर फंसे लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी आगे बढ़ने की धीमी रफ्तार रही। वाहन चालकों को रास्ता खुलने और यातायात का प्रवाह सामान्य होने का इंतजार करना पड़ा। मानगो से साकची, बिष्टुपुर और अन्य इलाकों की ओर जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक रही। शहर के प्रमुख संपर्क मार्ग पर लगा जाम रोजमर्रा की आवाजाही को प्रभावित करता नजर आया।
यातायात सामान्य होने का इंतजार
खबर सामने आने तक पुल पर जाम से पूरी राहत मिलने की जानकारी नहीं थी। वाहन चालक धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए रास्ता खुलने की उम्मीद लगाए रहे। लोगों को राहत तभी मिल सकती थी, जब वाहनों की कतार कम होती और पुल पर आवाजाही फिर सामान्य रफ्तार पकड़ती।












