
नई दिल्ली : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर पहुंचे। अमेरिकी धरती पर उनका जिस अंदाज में स्वागत किया गया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रचलित राजनयिक परंपरा से अलग हटकर स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर चीनी राष्ट्रपति की अगवानी की। दोनों महाशक्तियों के संबंधों में तनाव के बीच इस स्वागत को बेहद अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
1962 के बाद पहली बार दिखा ऐसा नजारा
रिपोर्ट के मुताबिक, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पहुंचकर विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का इस स्तर पर स्वागत करने का ऐसा दृश्य वर्ष 1962 के बाद पहली बार देखने को मिला। सामान्यतः किसी विदेशी मेहमान की अगवानी अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी या उपराष्ट्रपति करते हैं। इस बार राष्ट्रपति ट्रंप का स्वयं पहुंचना यात्रा को विशेष बनाने के साथ दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का संदेश भी देता दिखाई दिया। इससे पहले वर्ष 2015 में शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी करने नहीं पहुंचे थे। उस समय चीनी उपराष्ट्रपति ने स्वागत किया था। इसके विपरीत, वर्तमान यात्रा में ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहकर एक अलग कूटनीतिक संदेश दिया।
बी-1 बॉम्बर्स की गर्जना से गूंजा आसमान
शी जिनपिंग के विमान से उतरते ही अमेरिकी प्रशासन ने भव्य सैन्य सम्मान प्रस्तुत किया। स्वागत स्थल पर करीब 100 फीट लंबा लाल कालीन बिछाया गया था। अमेरिकी सेना की सलामी टुकड़ी, 21 जवानों का विशेष सम्मान गार्ड और दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज पूरे समारोह को प्रभावशाली बना रहे थे। स्वागत का सबसे आकर्षक हिस्सा अमेरिकी वायुसेना के दो बी-1 सुपरसोनिक बॉम्बर्स का लो-लेवल फ्लाईओवर रहा। विमानों की गड़गड़ाहट ने शक्ति प्रदर्शन का दृश्य प्रस्तुत किया। एयरपोर्ट पर संक्षिप्त बातचीत के बाद शी जिनपिंग का काफिला रवाना हुआ, जबकि ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप हेलीकॉप्टर से व्हाइट हाउस लौटे।
व्यापार से ताइवान तक कई मुद्दों पर चर्चा संभव
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान व्यापार, शुल्क, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नियमों पर बातचीत होने की संभावना है। लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक तनाव को कम करने के उपाय भी चर्चा का प्रमुख हिस्सा बन सकते हैं। इसके अलावा ताइवान, ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संवेदनशील वैश्विक विषय दोनों नेताओं की वार्ता में उठ सकते हैं। ऐसे समय में ट्रंप द्वारा किया गया यह असाधारण स्वागत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन संबंधों में नई दिशा तलाशने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।










